National Education Policy (NEP) -2020 : स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास

National Education Policy (NEP) -2020 : स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास

National Education Policy (NEP) -2020 : स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास


भारत सरकार द्वारा देश में शिक्षा की स्थिति में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए हैं। आइए हम इस editorial के मध्यम से स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकाश पर Concept को जानते और समझते है।


राधाकृष्णन आयोग (Radhakrishnan Commission ) / विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग -1948


स्वतंत्र भारत में पहली बार नवंबर 1948 में राधाकृष्णन आयोग का गठन किया गया था जिसे विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के नाम से भी जाना जाता है।


यह आयोग देश में विश्वविद्यालय शिक्षा के संबंध में रिपोर्ट देने हेतु बनाया गया था । 


इस आयोग ने निम्न सिफारिशें की थीं-


विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा ग्रहण करने से पहले 12 वर्ष का अध्ययन होना चाहिये।

उच्च स्तरीय शिक्षा  मुख्य रूप से तीन स्तर  की होनी चाहिए।

(i) सामान्य शिक्षा (ii) सरकारी शिक्षा  (iii) व्यवसायिक शिक्षा


विश्वविद्यालय शिक्षा को ‘समवर्ती सूची में सम्मिलित किये जाने का प्रस्ताव किया गया।


देश में विश्वविद्यालय शिक्षा की देख-रेख हेतु  एक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) का गठन किए जाने का प्रस्ताव रखा गया।


इन्हीं सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 1953 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का गठन किया।  पुनः 1956 में संसद में कानून पेशकर एवम पासकर इसे स्वायत्तशासी निकाय का दर्जा दे दिया गया। इस आयोग का कार्य विश्वविद्यालय शिक्षा की देखरेख, विश्वविद्यालयों में शिक्षा एवं शोध  जांच करना तथा उनमें समन्वय स्थापित करना है। 


1961 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ दौलत सिंह कोठारी को नियुक्त किया गया वे वहा दस वर्ष तक रहे।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 1968  (कोठारी आयोग)


1964 में भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ दौलत सिंह कोठारी को राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 1968 कोठारी आयोग के नाम से भी जाना जाता है।


आयोग ने 29 जून 1966 को अपनी रिपोर्ट को  पेश किया। 


भारत की प्रथम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 24 जुलाई 1968 को घोषित की गई। यह पूरी तरीके से कोठारी आयोग के रिपोर्ट पर आधारित थी।


इसमें शिक्षा प्रणाली का रूपान्तरण  10+2+3 पद्धति पर किया गया यानी दसवीं के बाद दो class एवम उसके बाद तीन Class (दसवी+ बारहवी+स्नातक स्तर)।


इसमें शिक्षा को राष्ट्रीय महत्व का बिषय माना गया।


शिक्षा पर केंद्रीय बजट का 6% व्यय किया जाएगा।


अनिवार्य एवं निशुल्क प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था की गई

इसी के अंतर्गत 1976 में शिक्षा को समवर्ती सूची में सम्मिलित कर लिया गया। 


राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 1986 (नवीन शिक्षा नीति)


इस नीति में भारतीय महिलाओं, अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जाति समुदायों के लिये शैक्षिक असमानताओं को दूर करने तथा अवसर की बराबरी करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।


प्राथमिक स्कूलों को बेहतर बनाने के लिये "ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड" इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 1986 में लॉन्च किया गया।


इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के साथ ‘ओपन यूनिवर्सिटी’ प्रणाली का विस्तार किया गया।

संशोधन - 1992


सन 1992 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-1986 में संशोधन किया गया जिसका उद्देश्य था देश में व्यावसायिक और तकनीकी कार्यक्रमों में प्रवेश के लिये All India स्तर पर एक Exam कराना। 

जैसे-Joint Entrance Examination-JEE तथा (All India Engineering Entrance Examination-AIEEE) 


शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) Act-2009


भारतीय संविधान के भाग 4 के अनुच्छेद 45 में बच्चों के लिए निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था थी जो की राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत होने के कारण यह न्यायालय द्वारा जरूरी नहीं ठहराया जा सकता था।

86 में संवैधानिक संशोधन अधिनियम 2002 के अंतर्गत अनुच्छेद 21A में घोषणा की गई है कि राज्य 6 से 14 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा  इसका निर्माण राज्य करेगा इस प्रकार यह व्यवस्था केवल आवश्यक शिक्षा के मूल अधिकार के अंतर्गत है न की  व्यवसायिक शिक्षा के संदर्भ में।

यह संशोधन देश में सर्वशिक्षा के लक्ष्य में 1 मील का पत्थर साबित हुआ है सरकार ने यह कदम नागरिकों का अधिकार के मामले में द्वितीय क्रांति की तरह उठाया है।


अनुच्छेद 21A के अनुसरण में संसद ने बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार RTE अधिनियम 2009 अधिनियमित करके इस अधिनियम के अंतर्गत यह व्यवस्था है कि 14 वर्ष की आयु तक के प्रत्येक बच्चे को संतोषजनक एवं समुचित गुणवत्ता वाली पूर्णकालिक प्रारंभिक शिक्षा का व्यवस्था किया जाय।


शिक्षा का अधिकार किसी भी स्तर पर है जिसमें व्यवसायिक शिक्षा जैसे चिकित्सा एवं इंजीनियरिंग भी शामिल है


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020


इस नई शिक्षा नीति में शिक्षा की पहुँच, समता, गुणवत्ता, वहनीयता और उत्तरदायित्व जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है।


राष्ट्रिय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा क्षेत्र पर देश की जीडीपी के 6% हिस्से के बराबर निवेश का लक्ष्य रखा गया है।

नई शिक्षा नीति-2020  के अंतर्गत ‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय’ (Ministry of Human Resource Development- MHRD) का नाम बदल कर ‘शिक्षा मंत्रालय’ (Education Ministry) कर दिया गया है।


1968 और वर्ष 1986 के बाद स्वतंत्र भारत की यह तीसरी शिक्षा नीति है। जोकि इसरो (ISRO) के पूर्व प्रमुख डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में जून 2017 में गठित की गई थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट मई 2019 में प्रस्तुत किया।


इस समिति के रिपोर्ट के आधार पर भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति 2020 को घोषित किया गया। जो वर्ष 2022 से लागू होनी है।


इस नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भारत के वर्तमान शिक्षा प्रणाली  10+2 के जगह 5+3+3+4 लागू कर दिया गया है।

क्या है (5+3+3+4) का Concept


आज तक भारत में 10+2 शिक्षा प्रणाली थी जिसमे बच्चे की स्कूल में एंट्री 6 वर्ष की उम्र में कक्षा 1 में होता था तथा बच्चा  12 वर्ष (10+2) तक किसी राज्य की बोर्ड के अधीन शिक्षा ग्रहण करता था फिर उसके बाद हायर education के लिए University में admission लेना पड़ता था।


लेकिन अब नई शिक्षा नीति के अंतर्गत बच्चे की स्कूल में एंट्री 3 वर्ष में होगी। तथा 5+3+3+4=15 वर्ष तक किसी राज्य बोर्ड के अधीन शिक्षा ग्रहण करेगा फिर Higher education के लिए University जायेगा।


यहां 5+3+3+4 स्टडी के लिए कुल चार  स्टेज है इन्ही को हमे बारी-बारी से समझना है।


पहला स्टेज- Foundation Stage (पहला 5 वर्ष)


यहां बच्चा 3 वर्ष के उम्र में स्कूल में एंट्री करेगा तथा पहले 5 वर्ष जो की  Foundation स्टेज होगा दो भागो में बटेगा यानी 5=(3+2)


3 वर्ष से 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिये आँगनवाड़ी/बालवाटिका/प्री-स्कूल की शिक्षा प्राप्त करेगा फिर

6 वर्ष से 8 वर्ष  तक के बच्चों को प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 और 2 में शिक्षा दी जाएगी।


इस स्टेज में बच्चे से कोई भी exam नही ली जाएगी।


दूसरा स्टेज - Preparatory Stage (दुसरा 3 वर्ष)


इस तीन वर्षो में बच्चा कक्षा 3, 4 व 5 की स्टडी करेगा तथा इस स्टेज में भी बच्चे से exam ली जायेगी।


इस स्टेज में बच्चे को उसके मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ने का प्रावधान किया गाय है।


तीसरा स्टेज - Middle Stage (तीसरा 3 वर्ष) 


इस तीन वर्षो में बच्चा कक्षा 6, 7 व 8 की स्टडी करेगा तथा इस स्टेज में भी बच्चे से exam ली जायेगी।


इसमें बच्चे को Computer code, Vocational/Tech, Maths, Science और Art इत्यादि की पढ़ाई करेगा।

इसमें बच्चा किसी एक भारतीय भाषा में पढ़ाई कर सकता है।


चौथा स्टेज - Secondary Stage (अंतिम 4 वर्ष)


इस चार वर्षो में बच्चा कक्षा 9, 10, 11 व 12 की स्टडी करेगा तथा इस स्टेज में भी बच्चे से exam ली जायेगी।


इसमें exam semester wise होगा यानी पहले की तरह 10वी तथा 12वी की बोर्ड के exam के बजाय प्रत्येक छमाही सेमेस्टर का एग्जाम देना होगा यानी कुल मिलाकर 8 एग्जाम देना होगा।


इसमें साइंस या आर्ट जैसे कोई स्ट्रीम का चुनाव करने का कोई विकल्प नहीं होगा बल्कि मल्टीपल सब्जेक्ट का चुनाव कर पढ़ाई कर सकते है।


इन सभी के अतिरिक्त इस स्टेज में एक विदेशी भाषा पढ़ने का भी विकल्प है।


Graduation स्नातक 


नई शिक्षा नीति 2020 के तहत graduation के पाठ्यक्रम को 3 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष कर दिया गया है।


स्नातक पाठ्यक्रम में मल्टी लेवल  एंट्री एंड एक्ज़िट व्यवस्था को अपनाया गया है यानी कोई स्टूडेंट graduation की एक वर्ष पढ़ाई कर छोड़ देता है तथा एक या दो वर्ष बाद आकार पुनः अगले कक्षा में एडमिशन ले सकता है।


इसके तहत छात्र कई स्तरों पर पाठ्यक्रम को छोड़ सकेंगे तथा पुनः दाखिला ले सकेंगे और उन्हें उसी के अनुरूप डिग्री या प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा जैसे -


1 वर्ष के बाद -प्रमाणपत्र 

2 वर्षों के बाद -एडवांस डिप्लोमा

3 वर्षों के बाद -स्नातक की डिग्री  

4 वर्षों के बाद -शोध के साथ स्नातक


Post Graduation - स्नातकोत्तर


नई शिक्षा नीति 2020 के तहत Post Graduation   के पाठ्यक्रम को  1 या 2 वर्ष के लिए रखा गया है। यानी कोई स्टूडेंट यदि स्नातक graduation की पढ़ाई 3 वर्ष का किया है तो उसे Post Graduation की पढ़ाई 2 वर्ष की करनी होगी तथा यदि वह 4 वर्ष की ग्रेजुएशन किया है तो उसे Post Graduation की पढ़ाई 1 वर्ष की करनी होगी। 


नई शिक्षा नीति 2020 के संबंध में कुछ अन्य तथ्य


राज्य सरकारों द्वारा वर्ष 2025 तक प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-3 तक के सभी बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त करने हेतु  योजना तैयार की जाएगी।

स्कूली शिक्षा के लिये राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा’ NCERT द्वारा तैयार की जाएगी ।


वर्ष 2030 के बाद अध्यापकों को अध्यापन के लिये कम से कम 4-वर्षीय एकीकृत बी.एड. डिग्री का होना आवश्यक किया जाएगा।


उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन को बढ़ाकर 50% तक करने का लक्ष्य रखा गया है, 


इस नीति के तहत (M.Phil)  को समाप्त कर दिया गया।

चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर पूरे उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिये एक सिंगल बॉडी के रूप में भारत का Higher Education Commission का गठन किया जाएगा।


तो  इस तरीके हमने स्वतंत्र भारत में शिक्षा के विकाश के Concept को समझा यदि यह मेरा Concept अगर आप लोगो को अच्छा लगा हो तो कृपया इस editorial को अपने दोस्तो को शेयर करे 





Information Technology Act (IT ACT) – 2000

Information Technology Act (IT ACT) – 2000

Information Technology Act (IT ACT) – 2000


IT ACT-2000, 9 जनवरी 2000 को पेश किया गया था।

30 जनवरी 1997 को संयुक्त राष्ट्र की जनरल एसेंबली में एक प्रस्ताव द्वारा सूचना तकनीक की नियमावली पेश किया गया जिसे यूनाइटेड नेशंस कमीशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड लॉ भी कहा जाता है।

संयुक्त राष्ट्र की इस नियमावली मेंं  communications  के लिए सूचना तकनीक या काग़ज़ के इस्तेमाल को एक समान महत्व दिया गया है तथा सभी देशों को इसे मानने के लिए कही गई है।

इस क़ानून में सभी देशों से यह अपेक्षा की जाती है कि सूचना के एक जगह से दूसरी जगह भेजने और उसके स्टोर के लिए काग़ज़ की जगह कोई अन्य  माध्यमों  के रूप में इस्तेमाल की जा रहीं तकनीकों से संबंधित कोई भी क़ानून बनाने या उसे संशोधित करते समय वे इस एक्ट के प्रावधानों का ध्यान रखेंगे, ताकि सभी देशों के कानूनों में एकरूपता बनी रहे।

इसी के बाद भारत मे सूचना कानून अधिनियम 2000 लाया गया ।

यह IT ACT, पहली बार 17 अक्टूबर 2000 को लागू हुआ । इसमें  कुल 13 अध्याय एवम  94 धाराएं हैं।

सूचना तकनीक क़ानून, 2000 में  हर ऐसे लेनदेन को क़ानूनी मान्यता देने की बात कही गई  है, जो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के दायरे में आता है और जिसमें सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए सूचना तकनीक का इस्तेमाल हुआ हो।

27 अक्टूबर 2008 को इस क़ानून में  पहली बार संशोधन किया गया। पुनः 5 फ़रवरी 2009 को फिर से संशोधित किया गया, इस संशोधन के अंतर्गत अध्याय 2 की धारा 3 में इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के स्थान पर  डिजिटल हस्ताक्षर कर दिया गया।

इसके अनुसार, सूचना के माध्यम से मतलब मोबाइल फोन या किसी भी तरह का  डिजिटल तरीके हो सकते हैं, जिनके माध्यम से किसी भी तरह की टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो या तस्वीरों को एक से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है।

New I T Act-2021

सर्वोच्च न्यायालय ने 11 दिसम्बर, 2018 के एक आदेश में कहा था कि सामग्री उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म और अन्य अनुप्रयोगों में चाइल्ड पोर्नोग्राफी, रेप और गैंगरेप की तस्वीरों, वीडियो तथा साइट को खत्म करने के लिये भारत सरकार आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार कर सकती है।

राज्यसभा की एक  समिति ने सोशल मीडिया अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा ऐसी सामग्री के मूल निर्माता की पहचान किये जाने की सिफारिश की।

यह नियम मुख्य रूप से सोशल मीडिया और ओवर-द-टॉप (Over-The-Top-OTT) प्लेटफार्मों हेतु लाए गए हैं।

[Over-The-Top-OTT-इन प्लेटफार्मों पर विडियो स्ट्रीमिंग की जाती है। जैसे Covid-19 के दौरान बॉलीवूड की सभी films, Hot star, Amazon, Sony Live, MX Player इत्यादि पर ऑनलाइन discharge हो रही थी ऐसे प्लेटफार्मों को ही OTT प्लेटफार्मों कहते है।]

इन नियमों को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की धारा 87 (2) के तहत तथा पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थाननों - जैसे Face book, Twitter, इत्यादि के लिये दिशा-निर्देश) नियम 2011 के स्थान पर लाया गया है।

सरकार द्वारा वीडियो स्ट्रीमिंग ओवर-द-टॉप [Video Streaming Over-The-Top (OTT)] प्लेटफॉर्म को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाया गया

इस नियम के अनुसार, OTT प्लेटफॉर्म को ऑनलाइन चयनित सामग्री का प्रकाशक कहा जाता है, इस सामग्री को पाँच आयु आधारित श्रेणियों-U (यूनिवर्सल), U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+ और A (वयस्क) में वर्गीकृत किया जाएगा।

U/A 13+ या उससे ऊपर की श्रेणी के लिये OTT प्लेटफॉर्म पर पैरेंटल लॉक का फीचर देना होगा और A श्रेणी के कंटेंट के लिये आयु को वेरिफाई करने का बेहतर मैकेनिज़्म तैयार करना होगा।

मानव समाज के विकास के नज़रिए से सूचना और संचार तकनीकों की खोज को बीसवीं शताब्दी का सबसे महत्वपूर्ण अविष्कार हो सकता है। सामाजिक विकास के अलग अलग क्षेत्रों में विशेषकर न्यायिक प्रक्रिया में इसके प्रयोग की महत्ता अत्यधिक हो सकती हैक्योंकि इसकी तेज़ गतिकई छोटी-बड़ी द़िक्क़तों से छुटकारा, गलतियों की कमीकम ख़र्चीला होना जैसे गुणों के चलते यह न्यायिक प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। इतना ही नहींऐसे मामलों के निष्पादन मेंजहां सभी संबद्ध पक्षों की शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य न होयह सर्वश्रेष्ठ विकल्प सिद्ध हो सकता है।

Twitter विवाद 


आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत परिभाषित किया गया है। कि-

मध्यस्थों mediaters को प्राप्त होने वाली शिकायतों के समाधान के लिए एक शिकायत अधिकारी की नियुक्ति होगी और इस अधिकारी के नाम व संपर्क details को साझा करना होगा।

अधिकारी को प्राप्त होने वाली शिकायत को 24 घंटे के भीतर होनी चाहिए तथा प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर इसका समाधान करना होगा।

मध्यस्थों को कंटेंट की शिकायत मिलने के 24 घंटों के भीतर उसे हटाना होगा या उस तक पहुंच को निष्क्रिय करना होगा जो किसी व्यक्ति की निजता को उजागर करते हों।

इस नए नियम के अनुसार, एक भारतीय निवासी के रूप में मुख्य अनुपालन अधिकारी, एक नोडल संपर्क व्यक्ति और एक रेज़ीडेंट शिकायत अधिकारी को नियुक्त करने की आवश्यकता है ।

यह भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध या सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित अपराधों की रोकथाम एवं उनका पता लगाने, जांच, अभियोजन या सज़ा के प्रयोजन हेतु आवश्यक है।


किसान आंदोलन के दौरान गणतंत्र दिवस पर किसानों ने ट्रैक्टर परेड निकाली थी. उसी समय लाल किले पर हिंसा हुई थी और उपद्रवियों ने तिरंगे की जगह धार्मिक झंडा फहरा दिया था. इसको देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा ट्विटर को लगभग 1000 अकाउंट ब्लॉक करने और कई विवादित हैशटैग हटाने को कहा गया था. सरकार का कहना था कि इनमें से कई अकाउंट खालिस्तान समर्थकों के हैंजो किसान आंदोलन में दुष्प्रचार कर रहे हैं और गलत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं.

सरकार के कहने पर  ट्विटर ने कुछ अकाउंट हटा दिया और विवादित हैशटैग भी हटा दिया लेकिन बाद में कई अकाउंट फिर से चालू कर दिया और कहा कि इनमें से अधिकतर लोग पत्रकारिता से संबंधित लोग है और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के हैं. ट्विटर ने एक बयान जारी कर कहा, "हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वकालत करते रहेंगे और भारतीय कानून के मुताबिक इसका रास्ता भी निकाल रहे हैं." केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्विटर की कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की।

इस संबंध मे नई IT ACT की धारा 79 मे उल्लिखित विवरणो को टिवीटर मानने से इंकार कर रहा है। इस वजह से विवाद और भी गहरा होते दिख रहा है।


 Immune System

Immune System

Immune System


रोग प्रतिरोधक क्षमता ढेर सारी  बीमारी से हमे सुरक्षित रखती है। ऐसे छोटे छोटे कई बीमारियां होती हैं जिनसे हमारा शरीर खुद ही निपट लेता है. 

अपने आसपास आप अकसर देखते होंगे कि कुछ लोग बार-बार बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं, जबकि कुछ पर मौसम की मार या संक्रमण वगैरह का भी ज्यादा असर नहीं होता।

हर जीवित शरीर में प्रकृति ने एक ऐसी व्यवस्था बनाई हुई है, जो उसे नुकसानदेह जीवाणुओं, विषाणुओं और माइक्रोब्स वगैरह से बचाती है। इसे ही रोगप्रतिरोधक शक्ति या Immunity कहा जाता है।

जिस व्यक्ति की इम्यूनिटी मजबूत है, उसके शरीर में रोगाणु पहुंचकर भी नुकसान नहीं कर पाते, लेकिन जिसकी इम्यूनिटी कमजोर हो गई हो, वह जरा-से मौसमी बदलाव में भी रोगाणुओं के आक्रमण को झेल नहीं पाता है

शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कैसे काम करती है।


जब बैक्टीरिया Bacteria जैसे रोगाणु शरीर में आते हैं, तो वे हमला करते हैं और बढ़ जाते हैं।
बैक्टीरिया या वायरस Virus के इस आक्रमण को एक संक्रमण के रूप में जाना जाता है जो शरीर में बीमारी का कारण बनता है।

हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ने के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग करती है।

रक्त में लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) होती हैं जो शरीर के ऊतकों और अंगों के कई हिस्सों में ऑक्सीजन ले जाती हैं, और सफेद रक्त कोशिकाएं (WBC) जिन्हें प्रतिरक्षा कोशिकाएं (Immune Cells) भी कहा जाता है, संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं।

सफेद रक्त कोशिकाओं  निम्नलिखित अवव्य होते हैं

मैक्रोफेज (Macrophages)-

ये कीटाणु, और मरने वाली कोशिकाओं को निगलती हैं और पचाती हैं. ये आक्रमण करने वाले कीटाणुओं  को पीछे छोड़ते हैं जिन्हें एंटीजन के रूप में जाना जाता है. परिणामस्वरूप शरीर एंटीजन को खतरनाक रूप में पहचानता है और उनसे लड़ने के लिए एंटीबॉडी को उत्तेजित करता है।

बी-लिम्फोसाइट्स (B-lymphocytes)-

यह मूल रूप से वे मैक्रोफेज द्वारा पीछे छोड़ दिए गए एंटीजन पर हमला करने के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन करते हैं।

टी-लिम्फोसाइट्स (T-lymphocytes)-

यह एक अन्य प्रकार के रक्षात्मक सफेद रक्त कोशिका हैं. इनका काम उन कोशिकाओं पर हमला करना है जो पहले से ही शरीर में संक्रमित हैं।

शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाएं

शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाएं इसे जानने से पहले हमें समझना होगा कि शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता किन कारणों से  कम हो जाती है। 

सफेद रक्त कोशिकाएं खून में हमेशा गश्त करती रहती हैं और ज्यादातर समय बाहरी आक्रमणकारियों की खोज करती रहती है ताकि शरीर की उनसे सुरक्षा की जा सके। 

लेकिन ऐसी कई बीमारियो के कारण सफेद रक्त कोशिकाओं की कार्यपद्धति प्रभावित होती है।

इसके अलावा कुछ दवाइयां भी हैं जो आपके रोगों से लड़ने की क्षमता और प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर करती हैं।

इतना ही नहीं आपकी बढ़ती उम्र भी इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाती है

जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है उन्हें अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने के साथ ही कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे-

1. कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग हमेशा स्वस्थ रहें इसके लिए बेहद जरूरी है कि वे साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें

2. अगर किसी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर है तो उन्हें किसी भी तरह के इंफेक्शन से पीड़ित या बीमार व्यक्ति के बेहद नजदीक जाने से बचना चाहिए।

3. तनाव के कारण भी व्यक्ति के इम्यून सिस्टम को कमजोर बना देता है, लिहाजा अपने तनाव को मैनेज करना और कंट्रोल करना भी बेहद जरूरी है। तनाव को कंट्रोल करने के लिए योग करें, मेडिटेशन करें, मसाज करवाएं, अपनी पसंदीदा हॉबीज को समय दें

4. नींद की कमी की वजह से इम्यून सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा- सफेद रक्त कोशिकाओं के सामान्य उत्पादन में कमी आती है। सीडीसी की मानें तो वयस्कों के लिए रोजाना रात में कम से कम 7 घंटे की नींद बेहद जरूरी है। वहीं बच्चों के लिए उनकी उम्र के हिसाब से 8 से 17 घंटे की नींद जरूरी है।

5. जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो उन्हें अपनी डायट में फल और सब्जियों को अधिक मात्रा में शामिल करना चाहिए ताकि उन्हें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त हो सकें। इसके अलावा कच्चे या कम पके हुए मांस, मछली और अंडे का सेवन न करें, पास्चरीकृत डेयरी प्रॉडक्ट्स का ही सेवन करें, फल और सब्जियों को खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह से धोकर साफ कर लें।

6.  रोज एक्सरसाइज करने से भी आपका शरीर स्वस्थ रहता है। एक्सरसाइज करने के दौरान एन्डॉर्फिन हार्मोन रिलीज होता है जिससे स्ट्रेस लेवल में कमी आती है। 

Immune system को बढ़ाने के लिए आप विटामिन-A , विटामिन-D, विटामिन-C, विटामिन-E, आयरन, फॉलिक एसिड, जिंक युक्त भोजन में या सप्लीमेंट का प्रयोग करें।










Coronavirus कोरोनावायरस

Coronavirus कोरोनावायरस

Coronavirus कोरोनावायरस


(Coronavirus) अनेकों प्रकार के वायरसो का एक समूह है जो कई सारे स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न कर सकता है। कोरोनावायरस एक प्रकार का Ribose Nucleic Acid (RNA) वायरस हैं। इनके कारण मनुष्य में श्वास तंत्र संक्रमण पैदा हो सकता है जिसकी गहनता हल्की से लेकर अति गम्भीर हो सकती है।  इनकी रोकथाम के लिए अब टीका (वैक्सीन) अब उपलब्ध है और उपचार के लिए प्राणी की अपने प्रतिरक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। 


उत्पति स्थान क्या है? कैसे पड़ा कोरोनावायरस नाम

इस बीमारी को पहली बार वुहान,चीन में पाया गया था, इसलिये इसे कभी-कभी "वुहान वायरस" या "वुहान कोरोनावायरस" कहा जाता है। मगर जगहों के नामों के आधार पर प्रयोग करने पर मनाही के कारण इसका नाम इसका नाम बुहान वायरस नहीं रखा गया। कोरोना वायरस के लक्षण एक हल्का ज़ुखाम से लेकर ज़्यादा गंभीर रोगों कि वजह हो सकती है जैसे कि मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (Middle East Respiratory Syndrome: MERS-CoV) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (Severe Acute Respiratory Syndrome: SARS-CoV) | यह वायरस से इंसान और जानवर दोनों संक्रमित हो सकते है  इस वायरस को अभी “SARS-CoV-2” का नाम रखा गया है और इसकि वजह से आने वाली बीमारी को “Corona Disease 2019” यानी “COVID-19” है |

लैटिन में "कोरोना" का अर्थ "मुकुट" होता है और इस वायरस के कणों के इर्द-गिर्द उभरे हुए कांटे जैसे ढाँचों से इलेक्ट्रान सूक्षमदर्शी में मुकुट जैसा आकार दिखता है, जिस पर इसका नाम रखा गया था। सूर्य ग्रहण के समय चंद्रमा सूर्य को ढक लेता है तो चन्द्रमा के चारों ओर किरण निकलती प्रतीत होती है उसको भी कोरोना कहते हैं। 

कैसे दिखता है कोरोनावायरस?

बड़े गोलाकार कणों के रूप में होते हैं।  वायरस के कणों का व्यास लगभग 120 नैनोमीटर होता है। जहां मेम्ब्रेन(झिल्ली), आकार का प्रोटीन डले होते हैं। कोरोना वायरस का एक उपसमूह (विशेष रूप से betacoronavirus उपसमूह A के सदस्य) हेमग्लगुटिनिन एस्टरेज़ नामक एक छोटा स्पाइक जैसी सतह भी प्रोटीन है। कैप्सूल के अंदर न्यूक्लियोकैप्सिड होते है, जो कि न्यूक्लियोकैप्सिड (एन) प्रोटीन की कई प्रतियों से बनता है। ये RNA युक्त विषाणु होते हैं।  जब यह होस्ट सेल के बाहर होता है तो लिपिड बाईलेयर कैप्सूल, झिल्ली प्रोटीन और न्यूक्लियोकैप्सिड वायरस की रक्षा करते हैं।


कोरोनावायरस का वंश


1.अल्फ़ाकोरोनावायरस 
2.बेटाकोरोनावायर
3.गामाकोरोनावायर
4.डेल्टाकोरोनावायर

अल्फ़ाकोरोनावायरस (Alphacoronavirus) वायरस के कोरोनाविरिडाए कुल के चार सदस्य जीववैज्ञानिक वंशों में से एक है। अल्फ़ाकोरोनावायरस और बेटाकोरोनावायरस मूल रूप से चमगादड़ में संक्रमण करने वाले वायरस के वंशज हैं जो मानवों व अन्य स्तनधारियों में भी फैल जाते हैं। 

कोरोनाविरिडाए (Coronaviridae)

वायरस का एक जीववैज्ञानिक कुल है। इसकी सदस्य जातियों को इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से देखने पर सूर्यग्रहण में दिखने वाली कोरोना जैसे उभराव दिखते हैं, जिस से इसका यह नाम पड़ा। यह आरएनए वायरस होते हैं जिनमें आरएनए के एक-रेशा और उसे ढेपता हुआ प्रोटीन का एक खोल होता है। कोरोनावायरस इसी कुल का सदस्य हैं। 


इस वायरस के मानव में।  इसका प्रसार मुख्य रूप से लगभग 6 फीट (1.8 मीटर) की सीमा के भीतर खांसी और छींक से होता है। दूषित जगह के माध्यम से अप्रत्यक्ष संपर्क, संक्रमण का एक और संभावित कारण है।

लक्षण

बुखार 87.9   सूखी खांसी 67.7  थकान 38.1 लार का निर्माण 33.4 गंध ना आना and स्वाद ना आना 30 से 66 सांस लेने में तकलीफ 18.6 मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द 14.8 गले में खरास 13.9 सर दर्द 13.6
ठंड लगना 11.4 उलटी अथवा मितली 5.0 नाक बंद 4.8 दस्त 3.7 से 31 हेमोटाईसिस 0.9 कंजेक्टिवल रक्त-संकुलन 0.8 इत्यादि।

 

कोरोनावायरस वैरिएंट 

दुनियाभर में जिस कोरोना वायरस ने इस वक्त तबाही मचा रखी है, लेकिन ये वो कोरानावायरस नहीं है जो पहली बार चीन से निकला था. बल्कि वह म्यूटेट हो रहा है।
म्यूटेट होने का मतलब है वायरस के जेनेटिक मटेरियल में बदलाव होना. वैज्ञानिकों ने इस वायरस में हज़ारों म्यूटेशन देखे हैं.

पहला म्यूटेटिड वायरस, B.1.1.7 था जो इंग्लैंड में पाया गया था इसे U K वेरिएंट भी कहते है। ये वेरिएंट पुराने वेरिएंट्स की तुलना में 40-70% अधिक संक्रामक  था। दूसरा वेरिएंट ब्राजील में E484K का पता चला। ये पिछले की तुलना में और अधिक खतरनाक पाया गया।  E484K से ताल्लुक रखने वाला ये म्यूटेशन एंटीबॉडीज को चकमा देने में माहिर पाया गया। इसके अतिरिक्त, N501 म्यूटेशन इसे और घातक बनाता है। इंडिया में उत्तपन कोरोना का डबल म्यूटेंट वेरिएंट, जिसे वैज्ञानिकों ने B.1.617 का नाम दिया है। कोरोना की दूसरी लहर के बीच इससे संक्रमित भी काफी मरीज पाए जा रहे हैं। कोरोना के सेकंड वेरिएंट में मौजूद E484Q और L452R म्यूटेशन्स, इसे ज्यादा संक्रामक और एंटीबॉडीज को पार कर शरीर में प्रवेश करने में सक्षम बनाते हैं। भारत के एक राज्य पश्चिम बंगाल में SARS-COV-2 के एक और नए वेरिएंट का पता लगाया गया है। वैज्ञानिक ने इसे B.1.618 नाम दिया है। ट्रिपल म्यूटेशन कोरोनावायरस वेरिएंट, जो कोविड के तीन अलग-अलग स्ट्रेन का एक समूह  है।दूसरे शब्दों में ट्रिपल म्यूटेशन का मतलब है कि कोरोना वायरस के तीन अलग-अलग स्ट्रेन यानी स्वरूप मिलकर एक नए वेरिएंट में बदल गए हैं।


तीन स्ट्रेन मिलकर बने इस नए टाइप में E484K जैसे अलग जेनेटिक वेरिएंट्स पाए गए हैं, ये थर्ड वेरिएंट उन लोगों के शरीर में भी एंटीबॉडीज को पार कर प्रवेश कर संक्रमित कर सकता है, जो पहले कोविड-19 से ठीक हो चुके हैं।